Saturday, January 8, 2011

मेरे बस का नहीं ...

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घंटो राहों में करना इंतज़ार मेरे बस का नहीं
तेरी बातों में दुं रातें गुज़ार मेरे बस का नहीं

एक ही बार पूछूंगा सिर्फ हाँ में देना जवाब
हर बात पे मिन्नतें बार बार मेरे बस का नहीं

दो गुण सौ अवगुण वाला इंसान पसंद तो देना साथ
बदलूँ खुद को तेरी पसंदानुसार मेरे बस का नहीं

तेरे घर की सीडियां चडके सांस फूल जाती है
ला सकूँ तोडके तारे हज़ार मेरे बस का नहीं

अबकी जन्मदिन पे मिलेगी सिर्फ दुआएं तुमको
दोस्तों से रोज लेना उधार मेरे बस का नहीं

रूठे जो इस बार मनाना मुश्किल हो शायद
लगाना झूठी तारीफों के अम्बार मेरे बस का नहीं

करने वाले करते हैं और आगे भी करते रहेंगे
पर ऐसा इश्क और ऐसा प्यार मेरे बस का नहीं

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