मतलब पड़ने पे मीठी बोली
निकला मतलब तो नश्तर चुभोती
आसान ना होता अपनी बात से फिरना
लगी जुबान में गर हड्डी होती
पेट की खातिर बिकते ईमान
सौ जुर्म होते पाने को दो रोटी
सारे फसाद ऐसे ही मिट जाते
जगह पेट के गर कमर ही होती
कदम कदम पे मिलते धोखे
दुश्मनी दोस्ती के साथ है सोती
भोंक ना पाता कोई खंजर पीठ में
निगरानी को गर पीछे भी नजर होती
रिश्तों की पहचान हुई मुश्किल
मोहब्बत रुसवाई के आंसू रोती
खेल ना सकता इस दिल से कोई बार- बार
दिल में भी गर थोड़ी बुद्धि होती
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its really nice one
ReplyDeleteand your vocabulary in hindi is outstanding.