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लो आज फिर एक हसीना से
मुझे प्यार हो गया
इश्क के मैदान में
हारी सभी बाजियों को भूल
बंदा फिर आज शहादत को तैयार हो गया
लो आज फिर दो नयनो में
मै गिरफ्तार हो गया
तीर -ए -नज़रों से छलनी
घावों के दर्द को भूल
सहने फिर नज़रों के बाणों को तैयार हो गया
लो आज फिर एक मुस्कुराहट का
मै शिकार हो गया
थोड़ी ख़ुशी के बदले मिले
लाखों आंसुओं को भूल
संजोने फिर चंद लम्हों को तैयार हो गया
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